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व्यंग : मुफ्त का खाओ स्कूटी घुमाओ घंटी बजाओ बाकी सब भूल जाओ……

कुछ लोग आजकल नौकरियों में आरक्षण निर्णय पर बेवजह सवाल क्यों उठा रहे हैं यह हम जैसे लोगों को पच नहीं पा रहा! उन्हें अब बिल्कुल सवाल नहीं उठाना चाहिए।क्योंकि वंचित समुदाय के एक व्यक्ति को राम मंदिर न्यास परषद में जगह दिया गया है और उस परिषद में कितने और लोगों को,और किन लोगों को जगह दिया गया,उनके बारे में चश्मा उल्टा कर खोजने पर भी अखबार में नहीं मिल पा रहा।तुमको एक मिला फिर भी सभी राष्ट्रीय चैनलों पर ढोल पीट-पीटकर रोज बताया जा रहा है एक दलित को जगह दिया गया है न्यास परिषद में।रंग बिरंगे स्याही से अखबारों में रोज मोटी मोटी अक्षरों में कई पन्ने भरे जा रहे हैं तुम्हें तमाम लोग बधाइयां दे रहे हैं। पर बेचारे उन लोगों के बारे में सोचो उन्हें तो कोई पूछ भी नहीं रहा है।फिर भी दर्द तुम्हें ही हो रहा है।समझो तुम्हें कितना इज़्ज़त बखसा जा रहा है 21वीं शताब्दी में भी।
इसके अलावा पूजा करने वाले भी तो आप ही लोग होंगे,नारा और जय जयकारा का जन्मसिद्ध अधिकार आपको मिला हुआ है,झंडा आप उठाएंगे फिर आपको नौकरी की तो जरूरत नहीं रही तो आरक्षण कि अब क्या जरूरत है।वैसे भी आरक्षण लेकर क्या कीजिएगा?
इन सबसे बढ़कर राजनीतिक रैलियों में नुक्कड़ सभाओं में जय जयकार करने के लिए आप ही की तो आवश्यकता होती है और भैया जब मुट्ठी भर लोग विदेश से जाकर उच्च शिक्षा प्राप्त करेंगे तो वे आराम से सरकार चला लेंगे।न्यायपालिका संभाल लेंगे।पत्रकारिता कर लेंगे। आप सब तो धर्म कर्म कीजिए मोक्ष की प्राप्ति लीजिए।शिक्षा के लिए,रोजगार के लिए क्यों लड़ते हो यह सब उन्हीं लोगों के लिए है जो छुआछूत के जन्मदाता हैं।देश में तेजी से सरकारी विद्यालयों की संख्या कम हो रही है इससे जो पैसा बचेगा उससे एक 2 साल जरूर चुनाव में की गई मुफ्त की घोषणा पूरा किया जा सकता है।चुनाव में आपको सब फ्री में मिलेगा ही निकम्मा बनकर बैठो।
जब फ्री में मोबाइल पर बात करना त्याग सकते हो,जितना खर्च नहीं कर सकते,उतना का मोबाइल डाटा खुशी खुशी प्राप्त करते हो,पांच-दस रुपया की जगह ₹219 का रिचार्ज करवा सकते हो तो फिर आरक्षण के लिए क्यों लड़ते हो। अपने फसल को कौड़ी के भाव बेंच सकते हो तो फिर माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय पर उंगली क्यों उठाते हो। तुम्हारे बच्चों को तो विद्यालयों में थाली उठाने का काम मिल ही गया है शिक्षक रहे या नहीं रहे भरपेट खाकर मॉनिटर तो बन ही जाएंगे।
एक बात और महिलाओं के लिए स्वयं सहायता समूह खुले हैं वे कर्ज लेकर आपको कर्ज में डालने का काम दिन-रात कर रही है तुम्हारे बचे खुचे पुश्तैनी संपत्ति बिक जाएगा और तुम फ्री हो जाओगे पॉकेट में हाथ डालकर घूमने के लिए।ना खेत में जाना पड़ेगा न खलिहान की रखवाली करने की चिंता होगी।2 रुपए किलो आटा का प्रबंध तो सरकार कर ही रही है मुफ्त में खाओ और मस्त रहो।
केस लड़ने का निर्णय तुम्हारे पक्ष में आ ही गया है जब तुम चाहो फौरन जाकर केस दर्ज कर दो केस करने में तो पैसा लगेगा नहीं।बस केस लड़ने आने जाने में हजार 500 खर्च होना कोई बड़ी बात है क्या ? शहर तो घूमने का मौका इसी के बहाने जो मिल जाएगा। हां कुछ खर्च वकील लोगों को भी देना पड़ेगा उन बेचारे की रोजगार भी तो तुम ही लोगों से चलता है पढ़ लिख जाओगे तो फिर लड़ाई झगड़ा कम करोगे तो इतना बड़े बड़े न्यायालय की जो बिल्डिंग बने हैं वह बेकार हो जाएंगे और वकील लोग को भी फिर दूसरा धंधा ढूंढना पड़ेगा। तो भाई कुछ पैसे जरूर खर्च होंगे लेकिन उसके बदले कानून के 2-4 धारा तो जान ही जाओगे। और हां इस केस के सहारे तुम अपने पड़ोसियों भाई बंधुओं पर रंग तो जमा सकते हो।पढ़ाई लिखाई से क्या फायदा बेकार के दफ्तर में गद्देदार कुर्सियों पर बैठना पड़ेगा!तुम्हें रास भी नहीं आएगा क्योंकि तुम्हें खेतों में सोने की आदत जो है। शराबबंदी का झुनझुना तुमको पकड़ा ही दिया गया है भले शराब तुम्हारे घर पहुंचाया जा रहा है। इसके बदले तुम्हारी चुनी गई सरकार राष्ट्रीय नहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार पा रही है यह क्या तुम्हारे लिए सम्मान की बात नहीं है।भले तुम्हारे पॉकेट से पूंजी चिड़िया की तरफ फुर हो जा रही है। नोबेल पुरस्कार तो सोचो नहीं भारत रत्न भी लेकर तुम क्या करोगे उससे क्या मिलता है तुम्हें तो बस चुनावी वादे से ही पेट भर जाता है।
अगर बड़े-बड़े सुविधा युक्त विद्यालयों में तुम्हारे बच्चे पढ़ने लगेंगे तो समझो तुम्हारी बात मानेंगे क्या। देश में जनसंख्या इतनी कम हो गई है कि पड़ोसी देश से आए लोगों को सरकार लड़कर नागरिकता प्रदान कर रही है।भले ही तुम्हारे दो से अधिक बच्चे होंगे तो उसका डंड तुम्हें चुनाव लड़ने से रोक कर दिया जाएगा।आने वाले समय में बची खुची नौकरियां भी इस आधार पर छीन लिया जाएगा।तुम्हारे बच्चे 1 साल के बी ऐड नहीं कर रहे थे इसलिए सरकार ने अब 2 वर्षीय नहीं 4 वर्षीय बीएड कोर्स कर दी है अब तो तुम्हारे बच्चे आसानी से 4 वर्षीय कोर्स करने का जहमत भी उठाना पसंद नहीं करेंगे और तुम्हारे पैसे भी बचेंगे।पढ़ाने के लिए निजाम को तो कोई ना कोई मिल ही जाएगा।बस तुम्हारे पूर्वजों के इतिहास पाठ्य पुस्तकों से हटा दिया जाएगा। आप लोगों को 500000 का स्वास्थ्य बीमा मिला है भले ही बीमा प्रदान करने वाली कंपनी को बेचा जा रहा है। क्योंकि बीमा कंपनी बेचकर आप सभी को निजी अस्पतालों में मुफ्त चिकित्सा सुविधा जो देना है।चलिए मुफ्त का खाइए,जय जयकार लगाइए,स्कूटी पर बैठकर इबादतगाह जाइए और अपनी उर्जा धर्म-कर्म में लगाइए बाकी सब भूल जाइए।

गुस्ताखी माफ

गोपेंद्र कुमार गौतम
सामाजिक और राजनीतिक चिंतक

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