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 व्यंग्य लेख : कोरोना नहीं कुछ करो न !

चीन! नाम तो सुना ही होगा। एक ऐसा देश जिसका नाम सुनकर सारी दुनिया से हम जाती है। यह देश सस्ती चीजों और कभी-कभी सस्ती मानसिकता के लिए भी जाना जाता है। चीनी सामानों के बारे में एक कथन प्रसिद्ध है- चला तो शाम तक नहीं तो चांद तक! इसका मतलब है चीन कि किसी भी चीज की कोई गारंटी नहीं है। अब आप पूछेंगे कि मैं चीन के बारे में इतना बखान क्यों कर रहा हूं? बखान न करूं तो क्या करूं! चीन ने सारी दुनिया को तोहफे के रूप में एक नई बीमारी जो दी है। वही भाई कोरोनावायरस नाम से तो किसी सुंदर हीरोइन से लगने वाली या संज्ञा सारी दुनिया को थर-थर कंपा रही है।

चीन को हमेशा कुछ ना कुछ गजब करने की आदत है। हमने बचपन में पढ़ा था मनुष्य सामाजिक प्राणी है। समाज में रहता है। फलता फूलता है। और यही मरता है। लेकिन चीन इसके विपरीत यह मानता है कि मनुष्य वन्य प्राणी है। वह वन में रहता है। फलता फूलता है। और वहीं मरता है। यही कारण है कि चीनवासी आहार श्रृंखला के नियमों को ताक पर रखते हुए कुत्ता, बिल्ली, सांप, बिच्छू, चूहे, चमगादड़, कीड़े-मकोड़े सब खाते हैं। यही कारण है कि चीन के पाठ्यक्रम व पाठ्यपुस्तक के मनुष्य को सामाजिक प्राणी कम और खूंखार प्राणी सबसे अधिक मानते हैं। हम सभी जानते हैं कि सबसे पहले कोरोना वायरस चमगादड़ जैसे जानवरों में देखा गया था, लेकिन इसे रातों-रात प्रसिद्धि की बुलंदियों पर ले जाने का श्रेय मात्र चीन को जाता है।

बीमारी भी बड़ी गजब चीज है। किसी के लिए यह पीड़ा है तो किसी के लिए व्यापार। अजीबोगरीब बीमारियों के नाम रखकर अजीबोगरीब ढंग से लोगों को लूटा जाता है। हमारा दुर्भाग्य देखिए कि जो चीजें मुफ्त होनी चाहिए वे चीजें शुल्कदेय हैं और जबकि जो चीजें शुल्क देय होनी चाहिए वे चीजें मुफ्त है। शिक्षा और चिकित्सा इसी का उदाहरण हैं।

दुनिया भर के लोग कोरोना वायरस से घबरा रहे हैं जबकि चीन इसके व्यापारी करण करने में जुट गया है। चीन की आर्थिक नीति दुनियाभर में प्रसिद्ध है। यही कारण है कि सारा संसार चीन का मुंह ताकता है। या देश बीमारियों से भी पैसा कमाने का दमखम रखता है। आए दिन नई नई बीमारियों का ईजाद करता रहता है। इसी श्रृंखला का हिस्सा है- कोरोना वायरस! प्रयोगशाला के तौर पर दुनिया की सबसे अधिक आबादी वाला देश तो है ही, यदि इनमें से चंद हजार लोग मर भी जाते हैं तो क्या फर्क पड़ता है। किंतु इस बीमारी के नाम पर दुनिया भर में डायग्नोस्टिक सेंटर का धंधा जोरों पर चलता है। डॉक्टरों की जेबें गर्म होने लगती है। फार्मा कंपनी गोली, कैप्सूल, इंजेक्शन के नाम पर करोड़ों अरबों का टर्नओवर करते हैं। हल्की सी छींक, खांसी, बुखार में कोरोना दस्तक देने लगता है।दुनिया भर में हाहाकार मच जाता है। तब सभी लोग चीन की ओर देखते हुए कहते हैं-जब कोरोना दिया है तो कुछ करो न! और फिर अपनी प्रयोगशालाओं में कोरोना के लिए रामबाण दवा बनाने में मग्न हो जाता है। इस बीच दुनियाभर के देश लोगों के भय को इलाज दवाइयों के नाम पर कैश करने लगते हैं और मन ही मन चीन को धन्यवाद देते रहते हैं।

डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’
सरकारी पाठ्यपुस्तक लेखक, तेलंगाणा सरकार,
मोबाइल नं. 73 8657 8657,
Email: [email protected]
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