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व्यंग्य : प्री होली बैंच मार्क कार्यक्रम!

प्यारे दोस्तो! सामने होली का त्यौहार दिखाई पड़ रहा है। इस मौके पर हमें अच्छी खासी तैयारी करनी पड़ती है। कई बार तो ऐसा लगता है कि यह त्योहारों की होली है या होली का त्योहार है। यह रंगो का खेल है या खेल के ही कई रंग! होली, डोली, ठिठोली, चोली, हमजोली, बोली, गोली है या रंगोली या फिर कोई भंगोली! जो कुछ भी है- ‘होली है!’ पर होली पूर्व की तैयारी तो जरूरी ही है। सबसे पहले आप आज ही अपना पुराना ट्रंक खोल डालिए। उसमें से पुराने, बुड्ढे-खूंसट कपड़ों को बाहर निकाल डालिए। फटे, पुराने, बदबूदार कपड़ों की होली पर बड़ी अहमियत होती है। कपड़े पुराने हों व मजबूत भी होने चाहिए। क्योंकि आप दूसरों के कपड़े जरूर फाड़ना चाहेंगे। झूमा-झटकी में कपड़े फटने से बचाने के लिए आप अपने लिए पुरानी टाट के कपड़े सलेक्ट कर लें तो ज्यादा अच्छा रहेगा। अब आप होली के 3 दिनों तक इन्हीं कपड़ों को पहने-पहने इतराने की आदत डाल लीजिए! जैसे लोग पुरानी नैतिकता के लबादे में फेसबुक पर जवानगर्दी व जबानगर्दी मचाते हैं। होली के बाद अगर आप खुद से रंग छुड़ाने की माथापच्ची से बचाना चाहते हैं तो आपको होली ही नहीं खेलनी चाहिए। अगर खेलना जरूरी हो तो होली के पहले से तैयारी करनी होगी जो रंग उतर जाने तक जारी रखनी पड़ेगी।

होली खेलने के पहले ही अपने चेहरे पर कोयले का तेल चुपड़ लें। वैसे आपका चेहरा कम कालिख पुता नहीं है फिर भी होली में यह सब जरूरी है। कोयले की दलाली वाली ग्रे क्रीम लगा लें। चेहरा तैलीय तो दिखेगा लेकिन यकीन जानिए इसका सुखद परिणाम आपको तब मिलेगा जब आप रंग उतारने की कोशिश करेंगे। आप कमीशन की वैसलीन और नेतागिरी के फाउंडेशन का भी इस्तेमाल कर सकते हैं, रंग आसानी से निकल जाएगा। अपने सारे शरीर पर ही बेहयाई के अरंडी तेल की मालिश कर लीजिए। फिर इसे दो घंटे की बेशर्मी वाली कुरकुरी धूप में सुखा लें। फिर तेल मालिश, फिर धूप क्रिया! इस घटना को पांच बार दोहराएं। पक्का फायदा होगा। बालों में ढेर सारा कड़वा तेल चुपड़ लें। अब इतना ज्यादा भी न चुपड़ें कि लोग इसमें ठंडे पकौड़े ही तलने लग जाएं। या फिर बालों में तवे की कालिख पोत लीजिए। अगर खोपड़ी आपकी हो और बाल दूसरे के हों तो यह ज्यादा फायदेमंद रहता है। इससे बालों से रंग निकालना आसान होता है। अपने नाखुनों को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें लंबे-लंबे बढ़ा लें। जो कोई रंग डारे जैसा जीव सामने आए तो उसे नोंच डालिए। नाखूनों पर जंगलीपने की असली गाढ़ी नेलपॉलिश लगा लीजिए। होली के दिन मौकापरस्त मेहमान भी आते हैं। अतः नमकीन-मिठाई की प्लेटें पहले ही तैयार करके हरगिज न रखें। आप उसी समय अपने रंगे हाथों-नाखुनों से ये प्लेट थमा दें, ताकि मेहमान ढेर सारा रंग भी खा सके। ये तो आपको सब पता है कि पानी के गिलास में रंग-कीचड़ से सनी चारों उंगलियां अंदर डालकर ही पानी पिलाना होता है। मैंने होली पूर्व ये सारी तैयारियां कर ली है। मैं हमेशा दोस्तों के लिए फायदे ढूंढ़ता हूँ अतः आपकी सेवा में ये सब सादर अर्पित है।

रामविलास जांगिड़,18, उत्तम नगर, घूघरा, अजमेर (305023) राजस्थान

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