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व्यंग्य : उंगली उठाने से पहले…

मोहन को लगता है कि पिछले कुछ दिनों से उसकी पत्नी ठीक से सुन नहीं पा रही है। वह इसके बारे में अपनी पत्नी से बात करना चाहता है। किंतु उसे यह भय है कि कहीं उसकी पत्नी उस पर बिगड़ न जाए। कहीं लेने के देने न पड़ जाए। वह अपनी पत्नी के बहरेपन को दूर करने के लिए उपाय करने लगता है। उपायों की कड़ी में वह डॉक्टर के पास जाता है। पत्नी की समस्या बताता है।
डॉक्टर मोहन की बात काफी ध्यान से सुनता है। कुछ देर सोचने-समझने के बाद एक उपाय सुझाता है। डॉक्टर उसे सलाह देता है कि तुम अपनी पत्नी से पच्चीस कदम की दूरी से कुछ पूछकर देखो। यदि वह जवाब देती है तो ठीक है नहीं तो बीस कदम की दूरी से पूछो। तब भी कुछ उत्तर न मिले तो इसी प्रक्रिया को पाँच-पाँच कदम कम करते हुए उसके समीप जाकर प्रश्न को दोहराते रहो। फिर भी उत्तर न मिले तो समझ जाना कि वह बहरी है। इसके बाद मेरे पास ले आना मैं इलाज कर दूँगा।
मोहन को डॉक्टर की बात पसंद आयी। वह तुरंत घर गया। पत्नी से पच्चीस कदम की दूरी पर ठहरकर पूछने लगा कि आज खाने में क्या बनाया है? कोई उत्तर न पाकर वह पत्नी के और समीप गया फिर से वही प्रश्न दोहराने लगा। इस बार भी कोई उत्तर नहीं आया। जब वह अपनी पत्नी से पाँच कदम की दूरी पर था तो पत्नी को कुछ बड़बड़ाते हुए देखा। मोहन कुछ और पूछ पाता तभी पत्नी उसके पास आयी और बोली कि जब से घर आये हो एक ही सवाल दोहराए जा रहे हो कि आज खाने में क्या बना है? मैं तब से कह रहूँ कि आज खाने में लिट्टी, चोखा बना है। लेकिन तुम्हें तो कुछ सुनायी ही नहीं देता। कहीं दिमाग खराब तो नहीं हो गया? तबियत तो ठीक है न? जाइए, किसी अच्छे डॉक्टर से अपने बहरेपन का इलाज करवाइए।
अब तो समझ में आ गया होगा कि समस्या किसमें थी। ऐसा कई बार देखा गया है कि समस्या हममें होती है और शिकायत सामने वाले की करते हैं। किसी पर उंगली उठाने से पहले हमें अपने गिरेबान में झाँककर देख लेना चाहिए। फिर चाहे वे सामान्य लोग हों, सरकार या फिर विपक्ष। यह सभी लोगों पर लागू होता है।

डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा उरतृप्त
सरकारी पाठ्यपुस्तक लेखक, तेलंगाना सरकार
चरवाणीः 73 8657 8657, Email: [email protected]
(https://hi.wikipedia.org/s/glu8)

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