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पीएच संतुलन क्या है और इसे कैसे पाएं

उमेश कुमार सिंह। विजय न्यूज़
शरीर के आंतरिक द्रवों का पीएच स्तर हमारी प्रत्येक जीवित कोशिका को प्रभावित करता है। जब पीएच लेवल असंतुलित हो जाता है, हमारे शरीर का प्रत्येक क्षेत्र नकारात्मक रूप से प्रभावित होता है, जिसके परिणामस्वरूप कैंसर, हृदय रोग, मोटापा, एलर्जीस, थकान और समय पूर्व बुढ़ापा आने जैसी समस्याएं हो जाती हैं, इसके साथ ही तंत्रिकाओं और मांसपेशियों की सामान्य कार्यप्रणाली भी प्रभावित होती है। आधुनिक जीवनशैली और खानपान की आदतों ने पीएच संतुलन को वार्निंग जोन में पहुंचा दिया है।
दिल्ली स्थित सरोज सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल केएचओडी सेंटर फॉर किडनी ट्रांसप्लांट डॉ.रमेश जैन का कहना है कि हमारा शरीर एसिड-अल्कलाइन का एक नाजुक संतुलन बनाए रखता है, इसे ही पीएच संतुलन कहते हैं। पीएच का अर्थ होता है (पोटेंशियल हाइड्रोजन), जो किसी भी सोल्युशन (घोल) में हाइड्रोजन आयन की माप है। मानव शरीर के लिए सोल्युशन का अर्थ होता है, शरीर के फ्ल्यूड्स और उत्तक। हमारे शरीर की प्रत्येक कोशिका पीएच के स्तर से प्रभावित होती है, स्वस्थ्य कोशिका से लेकर कैंसरग्रस्त कोशिका तक। जब हमारे शरीर का पीएच संतुलित होता है तभी वो मिनरल्स और विटामिन्स का ठीक प्रकार से अवशोषण कर पाता है। अगर पीएच असंतुलित होगा तो हम चाहे कितने भी पोषक तत्वों का सेवन करें, हमारा शरीर इनका अवशोषण या इस्तेमाल नहीं कर पाएगा। संतुलित पीएच कईं बीमारियों का खतरा कम कर देता है, जैसे बोन लॉस, हार्ट अटैक्स और अल्जाइमर्स डिसीज आदि।

निम्न पीएच के खतरे
पीएच का स्तर कम होना, एक खतरनाक स्थिति है, जो शरीर के सारे तंत्रों को कमजोर कर देती है। आज एसिडियोसिस के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, इसमें शरीर का वातावरण ऐसा बन जाता है कि वो आसानी से बीमारी का शिकार हो जाता है।

अंगों की कार्यप्रणाली गड़बड़ा जाना
शरीर का पीएच कम होने से, कार्बन डाई ऑक्साइड का संग्रह अधिक हो जाता है और ऑक्सीजन का स्तर कम हो जाता है, जिससे अंगों की कार्यप्रणाली गड़बड़ा जाती है।

रेस्पिरेटरी फेलियर
एसिडियोसिस के कारण हमारा श्वसन तंत्र नकारात्मक रूप से प्रभावित हो सकता है, सांस लेने में परेशानी हो सकती है, जिससे रक्त में एसिडिटी और बढ़ जाती है। अंतत: एसिडियोसिस इतना गंभीर हो जाता है कि रेस्पिरेटरी फेलियर हो जाता है।

दौरे पडऩा
जब एसिड का स्तर बढऩे से सांस लेने में दिक्कत होती है, तो व्यक्ति तेज-तेज सांस लेता है जिससे रेस्पिरेटरी अल्केलोसिस हो जाता है और शरीर का पीएच स्तर बढ़ जाता है, इसके कारण दौरे पड़ सकते हैं।

शॉक और मृत्यु
कभी-कभी एसिडियोसिस इतना गंभीर हो जाता है कि इसके कारण शॉक आ जाते हैं। अगर ये गंभीर होते हैं तो मृत्यु भी हो सकती है।

बोन लॉस, ऑस्टियोपोरोसिस और ऑस्टियोपेनिया
हमारे अल्कलाइन मिनरल्स, हमारी हड्डियों में संग्रह होते हैं, लेकिन जब पाचन मार्ग में एसिड की अधिकता होती है, तो हमारा शरीर इस एसिड से छुटकारा पाने का प्रयास करता है, इससे हड्डियों को नुकसान पहुंचता है।

कब जरूरी हो जाता है टेस्ट
डॉ.रमेश जैन का कहना है कि पीएच संतुलन एसिडिटी या अल्कलाइनिटी का माप होता है। अल्कालोसिस तब होता है जब शरीर के फ्ल्यूड में क्षारीयता अधिक होती है। एसिडोसिस, जब होता है जब रक्त के फ्ल्यूड अत्यधिक अम्लीय होते हैं। डॉक्टर लक्षणों के आधार पर, आपको टेस्ट कराने का कहेगा। ऑक्सीजन और कार्बन डाई ऑक्साइड के असंतुलन या पीएच असंतुलन के संकेतों में सम्मिलित हैं। सांस फूलना। श्वसन तंत्र से संबंधित दूसरी समस्याएं। जी मचलना, उल्टी होना, अगर आप ऑक्सीजन थेरेपी ले रहे हैं या आपकी कुछ निश्चित सर्जरियां हुई हैं, तो आपको अपने रक्त में ऑक्सीजन और कार्बन डाई ऑक्साइड का स्तर मापने के लिए नियमित अंतराल पर टेस्ट कराना चाहिए।

अधिक पीएच के खतरे
जब पीएच संतुलित होता है, तब आपका शरीर अल्कलाइन स्टेट में होता है और ये बहुत अच्छा होता है। इसका अर्थ होता है कि शरीर हानिकारक एसिड को निष्प्रभावी करने में सक्षम है और आपका शरीर उस प्रकार से काम करता है जिस तरह से उसे करना चाहिए।

अर्थराइमिया
अल्कलोसिस के कारण अर्थराइमिया या हृदय की धडक़नें अनियमित हो सकती हैं। यह तब हो सकता है जब शरीर में क्षार की मात्रा बढ़ जाती है, तो कार्बन डाईऑक्साइड का स्तर बढ़ हो जाता है और सोडियम बाय कार्बोनेट का स्तर कम हो जाता है। इससे सांस लेने की दर और कार्डिएक अर्थराइमिया बढ़ जाता है, इससे सांस लेने में परेशानी और छाती में दर्द हो सकता है।

कोमा
न्यूयार्क टाइम हेल्थ गाइड के अनुसार अल्कलोसिस के कारण सांस लेने में अत्यधिक परेशानी होती है, जिसके कारण कोमा की स्थिति हो सकती है। पोटेशियम का स्तर कम होना अल्केलोसिस के कारण इलेक्ट्रोलाइट का स्तर गड़बड़ा जाता है। रक्त में क्षार की मात्रा जितनी अधिक होगी, पोटेशियम का स्तर उतना कम हो जाएगा। इससे आपकी किडनियों, हृदय और पाचन तंत्र में समस्याएं हो जाएंगी।

रिस्क फैक्टर्स
कारक जो एसिडोसिस का खतरा बढ़ा देते हैं। उच्च वसायुक्त भोजन जिसमें कार्बोहाइड्रेट की मात्रा कम हो। किडनी फेलियर, मोटापा, डिहाइड्रेशन, डायबिटीज।

कैसे संतुलित रखें अपना पीएच
डॉ.रमेश जैन का कहना है कि अधिकतर खाद्य पदार्थ हमारे शरीर के पीएच संतुलन को गड़बड़ा देते हैं। कुछ खाद्य पदार्थ शरीर में एसिडिक बाय प्रोडक्ट्स छोड़ते हैं तो दूसरे अल्कलाइन-बाय-प्रोडक्ट्स छोड़ते हैं। पीएच संतुलन बनाए रखने वाले खाद्य पदार्थ, स्वस्थ्य पाचन का समर्थन करने वाले, रक्तका पीएच का स्तर बनाए रखने वाले और हड्डियों और किडनियों की सुरक्षा करने वाले होते हैं।

ग्रीन फूड्स की मात्रा बढ़ा दें
ग्रीन फूड्स में क्लोरोफिल पिग्मेंट प्रचूर मात्रा में होता है। क्लोरोफिल डिटॉक्सीफायर होता है और इम्युनिटी बढ़ाता है। व्हीट ग्रास जूस और दूसरे अंकुरित अनाज, ग्रीन फू ड्स हैं।

नींबू
हालांकि आम धारणा है कि नींबू एसिडिक होता है, लेकिन नींबू शरीर को अल्कलाइन करता है।

रूट वेजीटेबल
शकरकंदी और प्याज में इनुलिन की मात्रा अधिक होती है, ये भोजन में से कैल्शियम अवशोषित करने की शरीर की क्षमता बढ़ा देता है, जिससे ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा कम हो जाता है। रूट वेजीटेबल्स, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट का बहतरीन रिप्लेसमेंट है।

रिफाइंड शूगर से बचें
सोडा और फ्रूट दूसरे रसायनों की मात्रा अधिक होती है, जिससे यूरीन अधिक एसिडिक हो जाती है। इसका अर्थ है कि शरीर को अधिक मात्रा में बफरिंग मिनरल्स की जरूरत होती है, ताकि ये शरीर के एसिड को बिना यूरिनरी ट्रैक (मूत्रमार्ग) को क्षतिग्रस्त करे निकाल दें।

एनीमल प्रोटीन का इनटेक कम करें
मांसाहारी भोजन, अंडों और दूध व दुग्ध उत्पादों का सेवन कम मात्रा में करें, विशेषरूप से लाल मांस।

मल्टी विटामिन्स लें
अगर आपके शरीर के लिए केवल डाइट से पीएच संतुलन बनाए रखना कठिन हो रहा हो तो, आदर्श पीएच संतुलन प्राप्त करने के लिए सप्लीमेंट्स के द्वारा विटामिन्स की पूर्ति कर सकते हैं।

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