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क्यों मनाया जाता है भाई दूज?, कैसे करें पूजा?

दीपावली के बाद कार्तिक शुक्ल द्वितिया को भैया दूज का पर्व मनाया जाता है. इस तिथि से यमराज और द्वितिया तिथि का सम्बन्ध होने के कारण इसको यमद्वितिया भी कहा जाता है. इस दिन बहनें अपने भाई का तिलक करती हैं. उसका स्वागत सत्कार करती हैं और उनके लम्बी आयु की कामना करती हैं. माना जाता है कि जो भाई इस दिन बहन के घर जाकर भोजन ग्रहण करता है और तिलक करवाता है, उसकी अकाल मृत्यु नहीं होती. भइया दूज दूज के दिन ही यमराज के सचिव चित्रगुप्त जी की भी पूजा होती है. इस बार भइया दूज दूज का पर्व 29 अक्टूबर को मनाया जाएगा .

भइया दूज पर कैसे करें पूजा?
– इस दिन भाई प्रातःकाल चन्द्रमा का दर्शन करें
– इसके बाद यमुना के जल से स्नान करें या ताजे जल से स्नान करें
– अपनी बहन के घर जाएं और वहां बहन के हाथों से बना हुआ भोजन ग्रहण करें
– बहनें भाई को भोजन कराएं, उनका तिलक करके आरती करें
– भाई यथाशक्ति अपनी बहन को उपहार दें

इस दिन भगवान चित्रगुप्त की उपासना कैसे करें?
– प्रातः काल पूर्व दिशा में चौक बनाएं
– इस पर चित्रगुप्त भगवान् के विग्रह की स्थापना करें
– उनके समक्ष घी का दीपक जलाएं, पुष्प और मिष्ठान्न अर्पित करें
– उन्हें एक कलम भी अर्पित करें
– इसके बाद एक सफेद कागज पर हल्दी लगाकर उस पर “श्री गणेशाय नमः” लिखें
– फिर “ॐ चित्रगुप्ताय नमः” 11 बार लिखें
– भगवान चित्रगुप्त से विद्या, बुद्धि और लेखन का वरदान मांगें
– अर्पित की हुई कलम को सुरक्षित रखें, वर्षभर प्रयोग करें

इस दिन कैसे करें यमदेवता की उपासना?
– सायं काल घर के बाहर बाईं ओर मिटटी के कलश में भरकर जल रखें
– इसके ऊपर सरसों के तेल का चौमुखी दीपक जलाएं
– प्रार्थना करें की घर में रहने वाले सभी लोग दीर्घायु और स्वस्थ हों
– अगले दिन प्रातः कलश का जल घर के कोने कोने में छिड़क दें

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