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मन से ही जीत हार होती है सुनिश्चित : ए.के. मिश्रा

विजय न्यूज़ नेटवर्क
आप में से कई लोगों ने एल्विन टॉफलर द्वारा लिखित ‘फ्यूचर शॉक’ नामक पुस्तक अवश्य पढ़ी होगी. उनके अनुसार हम तेजी से बढ़ते सूचना एवं ज्ञान से घिरते जा रहे हैं. इस सूचना प्रणाली में नित नये परिवर्तन भी आ रहे हैं. ऐसे में इस परिवर्तन से तालमेल बिठाना कठिन होता जा रहा है. ये परिवर्तन इतने तेज हैं कि काफी लोग इस दौड़ में पीछे छूट सकते हैं. टॉफलर ने इस परिवर्तन को ‘फ्यूचर शॉक’ का नाम दिया है.
विशेष तौर पर प्रतियोगिता परीक्षाओं में शामिल होने वाले विद्यार्थियों की आज क्या स्थिति है? यकीनन सूचनाओं का दायरा बढ़ रहा है. ज्ञान एवं परीक्षा प्रणाली में नित नये परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं. परीक्षा में सफलता आपके जीवन के हर पहलू को प्रभावित करती है. ऐसी स्थिति में आपका प्रयास आमतौर पर तब सर्वश्रेष्ठ माना जाता है, जबकि आप अग्रलिखित प्रयासों से जुड़े हों-

  • अच्छी अध्ययन सामग्री पढऩा.
  • अच्छे संस्थानों में अध्ययन करना.
  • उष्कृट विद्वानों की मदद लेना.
  • कठिन परिश्रम करना इत्यादि.

हालांकि ऐसा प्रयास अनेक विद्यार्थी करते हैं. मगर कुछ और आवश्यक बातें हैं, जो सफलता और असफलता निर्धारित करती हैं. पिछले एक दशक में न्यूरो साइंस, मनोविज्ञान व मनोपचार पर आधारित शोधों से अनेक नये व रोचक तथ्य प्रकाश में आये हैं. यह दशक इतना महत्त्वपूर्ण रहा है कि अमेरिकी सिनेट ने इसे ‘डिकेड ऑफ ब्रेन’ ही घोषित कर दिया है. रोचक बात यह है कि इन शोधों एवं प्रयोगों का महत्व विद्यार्थियों या कुछ भी नया सीखने वालों के लिए बहुत अधिक है. संक्षेप में, हम इन बातों को दो भागों में बांट सकते हैं:-
1. स्वत: उठने वाले मन के नकारात्मक सोचों पर नियंत्रण पाना एवं उन्हें सकारात्मक रूप में ढालना. अगर आपके मन में अपनी पढ़ाई, स्वास्थ्य, कैरियर या परीक्षा को लेकर नकारात्मक विचारों का तांता लगा हुआ है, तो धीरे-धीरे आपके मन का भाव भी इसी तरह के विचारों के अनुकूल होता चला जायेगा और फिर ये भाव आपके कार्य को प्रभावित करेंगे. इस तरह से इनका एक चक्र चलता रहेगा और आपकी क्षमता में _ास होता रहेगा. इससे यह स्पष्ट होता है कि वास्तविक परिस्थितियां या घटनाएं नहीं, बल्कि हमारी समझ एवं सोच हमारे मन की स्थिति को निर्धारित करती है. जब हमारा मन परेशान, शंका से घिरा या तनावग्रस्त हो तो किसी घटना या स्थिति की समझ निश्चित रूप से वास्तविकता और तर्क से परे या फिर गलत होगी.
अगर लंबे समय तक यही स्थिति चलती रही, तो आपके मन की तुलना ऐसे रेडियो से की जा सकती है, जिससे कर्कश शोर आ रहा हो और जिसे ठीक से ट्यून नहीं किया गया हो. इसका अर्थ यह नहीं है कि रेडियो की बनावट में ही कोई खराबी है. आपको महज इसके डायल को ट्यून या संतुलित करना है. इसके बाद रेडियो फिर मधुर संगीत/स्वर देने लगेगा. जीवन में छोटी-मोटी समस्याओं का अंतहीन सिलसिला हो सकता है. मगर ऐसी स्थिति में उपदेशात्मक बातों या नेपोलियन या एमर्सन के उदाहरणों का कोई विशेष फायदा नहीं होता. इसके लिए हमें नकारात्मक सोचों को पहचानने, उन्हें चुनौती देने, उनकी जगह पर तार्किक विचारों को अपनाने की कला सीखनी होगी. इन विधियों की चर्चा हम अगले लेखों में करेंगे.
2. नवीनतम खोजों पर आधारित वैज्ञानिक ढंग की अध्ययन प्रणाली अपना कर अपने अध्ययन व सफलता को और अधिक प्रभावी बनाना. उपरोक्त बातों से आपने यह महसूस किया होगा कि अगर हम अपनी स्वत: नकारात्मक सोचों पर काबू पा सकें तो हम परिस्थितियों को वास्तविक रूप में देख सकते हैं और फिर सही व सामयिक हल ढूंढ सकते हैं. इससे निश्चित रूप से हमारी कार्यक्षमता का विकास होगा, मन शांत होगा व सफलता का मार्ग प्रशस्त होगा. मगर आपके जीवन के दूसरे महत्वपूर्ण पहलू हैं-अध्ययन, परीक्षायें, इंटरव्यू… आदि.
क्या आप इस बात से पूर्णतया आश्वस्त हैं कि आपके अध्ययन करने का वर्तमान ढंग प्रभावशाली है? याददाश्त व याद करने का तरीका अनुकूल है? क्या आप समूचे विषय को, किसी लेख को या किसी प्रश्न को लिखने से पहले कुछ ही क्षणों में बिल्कुल अच्छी तरह से विजुअलाइज कर पाते हैं? पढ़ाई में ध्यान स्थिर कर पाते हैं, तनाव व थकान से मुक्त हो पाने की सरल विधियां जानते हैं, घबराहट या नकारात्मक ख्यालों का तांता तोड़ पाने की सरल विधियों का प्रयोग करते हैं? आप चाहें तो अपनी अध्ययन संबंधी दूसरी समस्याओं को भी इनमें जोड़ सकते हैं. नि:संदेह अध्ययन को प्रभावशाली बनाने के लिए ‘लर्निंग हाउ टू लर्न’ जरूरी है. एक महत्वपूर्ण बात जो समझने वाली है, वह यह है कि सिर्फ कठिन परिश्रम ही सफलता के लिए काफी नहीं है. अपने मन को सफलता के लिए ‘प्रोग्राम’ करना एवं अपने अध्ययन, याददाश्त, विजुअलाइजेशन, ध्यान, सकारात्मक सोच को विकसित करना, ध्यान एवं तनाव मुक्ति की सरल विधियों का प्रयोग करना भी आवश्यक है. ये सभी बातें न तो कठिन हैं और न ही इनके लिए कोई अतिरिक्त समय की आवश्यकता है. अगर आप इन बातों से संबंधित अपने विचार हमें लिखें तो हमें प्रसन्नता होगी.

मन से हीे जीत हार होती है सुनिश्चत
सक्सेस गुरु ए.के. मिश्रा
निदेशक
चाणक्य आईएएस एकेडमी, नई दिल्ली

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