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सत्र में फुल कॉन्फिडेंस में दिखेगी सरकार

संसदीय सत्रों के इतिहास में ऐसा पहली बार होगा जब कोई सरकार सदन में पूरी तरह से काॅन्फिडेंट होगी। अक्सर देखा गया है जब सत्र शुरू होता है तो सिटिंग सरकारें विपक्ष के हमलों से बचने के रास्ते खोजती हैं। लेकिन इस बार केंद्र सरकार के लिए माहौल पहले से जुदा है। सरकार आत्मविश्वास के साथ सदन में अपनी आमदगी दर्ज कराएगी। उनके अति-आत्मविश्वास का कारण दो बड़े मसलों पर विजय पाना है। भारतीय राजनीति में इन दो नासूर मुद्दों ने हमेशा देश का सौहार्द्र बिगाड़ा। जमकर राजनीति होती आई। इन मुद्दों की आड़ लेकर सरकारें बनीं और गिरी भी। लेकिन अब दोनों मसले खत्म हो चुके हैं। जम्मू-कश्मीर से धारा 370 व आर्टिकल 35ए और राम मंदिर का मसला सुलझ चुका है। जम्मू का मसला केंद्र सरकार ने सुलझाया तो वहीं मंदिर का मसला कोर्ट द्वारा। लेकिन जनता दोनों का श्रेय प्रधानमंत्री मोदी को ही दे रहे हैं। सरकार उन्हें भुनाना भी चाहेगी।
सियासत से धारा 370 व 35ए और राम मंदिर जैसे बड़े मुद्दों के खत्म होने के बाद आज से शुरू हो रहे संसद का शीतकालीन सत्र कई मायनों में खास होगा। देशवासियों की नजरें इस बार सत्र के बीच संसद सदस्यों में होने वाली बहस और लोकसभा अध्यक्ष द्वारा की जाने वाली कार्रवाई पर रहेंगी। फिलहाल, मंदिर पर तो नहीं, लेकिन जम्मू-कश्मीर मुद्दे पर संसद में जोरदार हंगामे की आशंकाएं हैं। मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस जम्मू-कश्मीर पर सरकार को घेरने के लिए पूरी तैयारी की है। संभावनाएं ऐसी भी हैं कि इस बार हो सकता है केंद्र सरकार संशोधित नागरिकता बिल को भी पेश कर दे। केंद्र सरकार ने उच्च सदन में पेश करने के लिए 22 महत्वपूर्ण बिलों की सूचि तैयार की है। उनके कुछ बिल ऐसे हैं जिनपर शुरूआती दौर की चर्चाएं पिछले सत्र में हो चुकी हैं।
केंद्र सरकार सदन में कितनी भी आत्मविश्वास से क्यों न भरी हो, लेकिन फिर भी नागरिकता संशोधन विधेयक बिल को सदन में पेश कराने में दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। इस मसले पर जमकर हंगामा होना तय है। खुदा-न-खास्ता अगर यह बिल पास हो भी जाता है तो बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए शरणार्थियों को हिंदुस्तान में रहने के लिए नागरिकता दी जा सकेगी। नागरिकता संशोधन विधेयक के तहत कुछ समुदाय जैसे सिख, हिंदू, ईसाई, बौद्ध, पारसी, और जैन शरणार्थिी जो पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आकर यहां लंबे समय से रह रहे हैं, ऐसे लोगों को नागरिकता मिलने का रास्ता खुल जाएगा। हालांकि मुख्य विपक्षी दल मसलन कांग्रेस, लेफ्ट पार्टियां, तृणमूल कांग्रेस समेत कई और पार्टी पहले से ही इस बिल के विरोध में खड़ी हैं। वह रोड़ा जरूर डालेंगी। पर, सरकार बिल इसलिए भी पास कराना चाहेगी, क्योंकि कुछ दिन पहले ही केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने वादा किया था कि उनकी सरकार जल्द इस बिल को सत्र में लाएगी। इसलिए सरकार अपने महत्वपूर्ण मंत्री का कहा वादा पूरा करना चाहेगी।
गौरतलब है, नागरिकता संशोधन विधेयक के अलावा विपक्ष के हाथ में जम्मू मसले का बड़ा मुद्दा भी होगा। इस मुद्दे को लेकर विपक्ष सत्र के प्रत्येक दिन घेराबंदी कर सकती है। कांग्रेस खासकर मोदी सरकार पर जम्मू में नजरबंदी किए गए स्थानीय नेता की स्थिति को स्पष्ट करने का दबाव डालेगी। इस लिहाज से सरकार को दोनों सदनों में जम्मू-कश्मीर की स्थिति को बताना होगा। विपक्ष का मानना है कि जम्मू में जनजीवन अब भी प्रभावित है। वहां अभी भी इंटरनेट, फोन, सोशल मीडिया, मैसेज आदि पर पाबंदी लगी हुई है। जबकि, सरकार उनके आरोपों को सिरे से नकार रही है। सरकार का तर्क है वहां का जीवन अब पहले से पटरी पर आ चुका है। इन सबका बिंदुवार जबाव विपक्ष सरकार से सत्र में चाहेगी।
मोदी सरकार को नियमों में बदलाव करने के तौर पर भी देखा जाता है। इसी कड़ी में संसद सत्र में इस बार कुछ बदलाव किया गया है। सत्र की समयविधि कम की गई है। पर, सत्र कम दिनों का जरूर है लेकिन सरकार इंडस्ट्रियस रिलेशंस कोड बिल-2019, मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी बिल-2019, मेंटनेंस ऐंड वेलफेयर ऑफ पैरंट्स ऐंड सीनियर सिटिजंस अमेंडमेंट बिल-2019 जैसे महत्वपूर्ण बिलों को सदन के पटल पर रखना चाहेगी। वैसे सरकार पूरी तरह से आश्वस्त है उनको सफलता मिलेगी। शीतकालीन सत्र में महाराष्ट्र का सियासी मसला भी उठ सकता है। इससे शिवसेना और भाजपा में तकरार देखने को मिल सकती है। पिछले सत्र के कई ऐसे पेडिंग बिल हैं जिन्हें सरकार मौजूदा सत्र में पास कराना चाहेगी। सरकार नागरिकता संशोधन बिल प्राथमिकता के रूप में लेकर चल रही है। सरकार को भी पता है कि इसको लेकर हंगामा कटेगा। क्योंकि कांग्रेस शुरू से ही नागरिकता बिल का विरोध कर रही है।
बहरहाल, इन सबके अलावा विपक्षी पार्टियां अर्थव्यवस्था की धीमी रफ्तार को भी मुद्दा बनाएंगी। अर्थव्यवस्था को लेकर विपक्ष जोरदार हंगामा करेगा यह तय है। शीतसत्र में केंद्र सरकार कई महत्वपूर्ण अध्यादेशों को पारित कराना चाहेगी। इस बार मसल-मुद्दे काफी हैं। बावजूद इसलिए सत्र का समय कम रखा गया है। शीतकालीन सत्र 13 दिसंबर तक ही चलेगा। जबकि, बीते दो वर्षों में शीतकालीन सत्र 21 नवंबर को शुरू हुआ था जो जनवरी के पहले सप्ताह तक चले थे। लेकिन इस बार जल्दी समेटा जा रहा है। कम समय क्यों रखा गया, इसका भी विरोध विपक्षी पार्टियां कर सकती हैं। सत्र से दो दिन पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा गई सर्वदलीय बैठक में भी विपक्षी नेताओं ने इस मसले का उठाया था।
सूत्रों से विपक्षी दलों से जो बातें निकलकर आई हैं। संसद में बहस करने के उनके मुद्दों में आर्थिक मंदी और कश्मीर मुद्दा सबसे अहम होगा। ऑटो सेक्टर से पिछले दिनों सैकड़ों कर्मचारियों को निकाला गया। सरकार को घेरने के लिए विपक्ष के पास यह बड़ा मुद्दा होगा। खैर, पक्ष-विपक्ष दोनों बड़ी तैयारियों के साथ सत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे। सत्र से एक सप्ताह तक सरकार व विपक्षी पार्टियों ने खूब तैयारियां की हैं। चालू सत्र में शायद जीएसटी में कुछ बदलाव किया जाए। क्योंकि जीएसटी के नए स्लैब से मध्यम वर्ग का व्यापारी परेशान है। बीते सत्र में भी इस मसले पर व्यापक बहस हुई थी। लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल सका।
दरअसल, ये ऐसे मसले हैं जिनपर विपक्ष सरकार से मुकम्मल चर्चा करना चाहेगा। सरकार के समक्ष चुनौती बस यही रहेगी कि वह विपक्ष के सभी मसलों पर बिंदुवार जवाब दे। मध्यम स्तर के अधोगों व ऑटो सेक्टर से लेकर अन्य क्षेत्रों में जारी आर्थिक लचरता पर सरकार के खिलाफ विपक्ष एकजुट हो सकता है। विगत दिनों ऑटो सेक्टर में भारी मंदी की गिरावट को लेकर खबरें मीडिया में आई। हालांकि उस पर यादा चर्चाएं नहीं हुई। कपास और कपड़ा उद्योग में भी इसी तरह की खबरें आईं थी। वहां भी बुरे हालात हैं। इन दोनों सेक्टरों के लिए कुछ फायदे की घोषणाएं सरकार कर सकती है। इन क्षेत्रों में सरकार टैक्स में कुछ कटौती कर सकती है। सत्र में विपक्ष की ताकत इस बार मजबूत होगी। क्योंकि सरकार से शिवसेना अलग हो चुकी है। साथ ही एलजेपी ने भी आंखे तरेरना शुरू कर दिया है।

डाॅ0 रमेश ठाकुर,
पताः 5/5/6, द्वितीय तल, गीता कालोनी, दिल्ली-110031
संपर्कः 9350977026

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