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महिला काव्य मंच गुरुग्राम की काव्य गोष्ठी सम्पन्न 

मिल कर जीवन मे नई सुबह फिर लाएंगे

नई दिल्ली। महिला काव्य मंच गुरुग्राम इकाई की अध्यक्षा दीपशिखा श्रीवास्तव’दीप’ की अध्यक्षता में
डिजिटल काव्य गोष्ठी का बेहतरीन आयोजन किया गया।
गोष्ठी का शुभारंभ मंच की अध्यक्षा दीपशिखा श्रीवास्तव ‘दीप’ ने मां शारदे को माल्यार्पण व आराधना के साथ किया एवं संचालन महासचिव अंजू सिंह ने किया।
काव्य गोष्ठी में साहित्यकार शकुंतला मित्तल की पंक्तिया-
धैर्य,संयम,सहयोग से हम संकट को हराएंगे,
मित्रों!मिल कर जीवन में नई सुबह फिर लाएंगे।
दीपशिखा श्रीवास्तव’दीप’ ने अपनी रचना के माध्यम से कहा-
तेरे बिना सूना-सूना सा शहर लगता है!
यहाँ की हवा में घुला सा जहर लगता है!!

प्रीति मिश्रा की पंक्तिया –
मुझ पर उनकी जफ़ाओं का असर नहीं लगता
ए बुरे वक्त!तू क्यों जल्दी गुजर नहीं जाता।

सविता स्याल ने कहा-
देखो हरियाली, बादल की दुल्हनिया मुस्कुराती
खड़ी ओढे हरी चुनरिया।

आभा कुलश्रेष्ठ ने कहा-
वहीं हवा है,वहीं फिजा है इस पर किसने अधिकार किया है

एकता कोचर रेलन की पंक्तियाँ-
आएगी बच्चों जब कोई विपदा राह में
थकना नहीं,रुकना नहीं,थमना नहीं तुम रात में।

मोनिका शर्मा ‘मणि’ ने कहा-
तुम मेरे राम हो मै तुम्हारी सिया
पास आकर गले से लगा लो जरा।

नीरजा मल्होत्रा ने कहा-
नारी तुम दीप हो
नव निर्माण, नव आयाम की
नव कल्पना और नव संवाद की रीत हो।

अंजू सिंह की पंक्तियाँ-
मेरी हाथों की लकीरों का हिसाब हो तुम
जो ना लिखा उन लफ्जों का सवाब हो तुम।

रश्मि चिकारा की पंक्तियाँ-
अंधेरों में रहने की आदत है हमें उजाले से डर लगता है।
ना छेड़ मेरे जज्बात को कुछ कहने से डर लगता है।।

सुजीत कुमार की पंक्तियाँ-
जो तुमसे कह दूँ ऐसी बात अभी है ही नहीं।
मेरे अंदर कोई जज्बात अभी है ही नही।।
आज की परिस्थिति को देखते हुए सभी साहित्यकारों ने अपनी मनमोहक रचनाओं से गोष्ठी में समा बांध दिया।
अंत में रश्मि चिकारा ने सभी साहित्यकारों का धन्यवाद ज्ञापित किया।

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