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विश्व ब्रेन ट्यूमर दिवस 8 जून 2021

ब्रेन ट्यूमर के बारे में जागरूकता फैलाने से ही कम हो सकती है मृत्यु दर

गुरुग्राम। लोगों के दिमाग में एक आम धारणा रही है कि मस्तिष्क की कोई भी शल्य चिकित्सा से ज्यादातर मरीज स्थायी रूप से लकवाग्रस्त या निष्क्रिय स्थिति में पहुंच जाते हैं। वहीं, ब्रेन ट्यूमर के बारे में आम लोगों के बीच यह जानकारी देना बहुत जरूरी है कि अत्याधुनिक न्यूनतम शल्य क्रिया और हाई—टेक उपकरणों के इस्तेमाल से मरीज में मृत्यु का खतरा नहीं के बराबर रह जाता है और यह अत्यंत सुरक्षित इलाज है।

ब्रेन ट्यूमर के इलाज को लेकर न्यूरोसर्जरी के क्षेत्र में हुई हाल की तरक्की के कारण न्यूनतम शल्य क्रिया इलाज की सबसे बेहतरीन पद्धति बनकर उभरी है। ब्रेन ट्यूमर के कम से कम 45 फीसदी मामले कैंसर—मुक्त होते हैं और इसलिए सही समय पर इलाज कराने से मरीज सामान्य जीवन जी सकता है और सामान्य गतिविधियां भी जारी रख सकता है।

सही समय पर सर्जरी कराना बहुत जरूरी है क्योंकि इससे न सिर्फ ट्यूमर के लक्षण पूरी तरह ठीक हो जाते हैं बल्कि अन्य घातक जटिलताएं भी नहीं उभर पाती है। लेकिन यदि मरीज और उनके परिजन सर्जरी की जटिलताओं से घबराकर यदि इलाज का दूसरा विकल्प आजमाने लगते हैं तो मरीज की स्थिति और बिगड़ सकती हैं।

आर्टमिस हॉस्पिटल में एग्रिम इंस्टीट्यूट आॅफ न्यूरो साइंस के न्यूरोसर्जरी विभाग के निदेशक डॉ. आदित्य गुप्ता ने कहा, ‘ब्रेन ट्यूमर के इलाज के लिए समर्पित उपचार केंद्र का होना बहुत जरूरी है। साथ ही माइक्रोसर्जिकल उपचार क्रिया, एंडोस्कोपिक पद्धति जैसी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए ट्यूमर के सटीक स्थान का पता लगाने के लिए नैविगेशन तकनीकों से यह इलाज किया जाता है। नई आकर्षक टेक्नोलॉजी और रोबोटिक साइबरनाइफ रेडियोसर्जरी से इलाज की 100 फीसदी सफलता मिलती है और इसमें कोई खास योजना बनाने की जरूरत या जोखिम नहीं रहता। यह पद्धति छोटे कैंसर—मुक्त ट्यूमरों के लिए विशेष रूप से कारगर है। हमारे ब्रेन ट्यूमर सेंटर में हमने मेडिकल तथा रेडिएशन आॅन्कोलॉजी सहयोगियों के सहयोग से इन पद्धतियों पर काम करते हैं। इस तरह की समग्र, टीमवर्क और टेक्नोलॉजी आधारित पहल हमारी सफलता का मूलमंत्र है।’

भारत में ब्रेन ट्यूमर से मौत मृत्युदर का दसवां सबसे बड़ा कारण है, क्योंकि इस जानलेवा रोग के मामले तेज गति से बढ़ रहे हैं और अलग—अलग आयुवर्ग के लोगों में अलग—अलग प्रकार के ट्यूमर होने के मामले सामने आ रहे हैं। ये ट्यूमर कैंसरयुक्त (असाध्य) या कैंसर—मुक्त भी होते हैं। जब असाध्य ट्यूमर बढ़ने लगता है तो इससे खोपड़ी पर असह्य दबाव बढ़ने लगता है और मस्तिष्क लगातार क्षतिग्रस्त होते रहने के कारण यह जानलेवा भी बन जाता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के सहयोग से इंटरनेशनल एसोसिएशन आॅफ कैंसर रजिस्ट्रीज (आईएआरसी) द्वारा जारी ग्लोबोकैन 2018 रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में हर साल ब्रेन ट्यूमर के 28,000 से ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं। इस न्यूरोलॉजिकल बीमारी से जूझ रहे तकरीबन 24,000 मरीज अपना जीवन गंवा बैठते हैं।

उन्होंने कहा, ‘नए जमाने के एमआरआई स्कैन में मस्तिष्क में ट्यूमर की सही जगह का सटीक पता लगाने की क्षमता है। मस्तिष्क के सक्रिय हिस्सों में भी फंक्शनल एमआरआई (एफ—एमआरआई) की सहायता से भी स्वस्थ कोशिकाओं को प्रभावित किए बिना ट्यूमर का सटीक पता लगाया जा सकता है।’

 

डॉ. आदित्य गुप्ता

 

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