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योशीहिदे सुगा बने जापान के नए प्रधानमंत्री

टोक्यो. शिंजो आबे के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद योशीहिदे सुगा को जापान का नया प्रधानमंत्री चुना गया है. इससे पहले देश की सत्तारूढ़ पार्टी ने योशीहिदे सुगा को अपना नया नेता नामित किया था. शिंजो आबे ने पिछले महीने स्वास्थ्य कारणों के आधार पर अपने इस्तीफे की घोषणा की थी. 71 साल के योशीहिदे सुगा शिंजो कैबिनेट के मुख्य सचिव थे. सुगा शिंजो आबे के काफी करीबी सहयोगी रहे हैं. संभावना है कि वह पूर्व पीएम शिंजो आबे की नीतियों को ही जारी रखेंगे.

सितंबर 2021 के चुनाव तक प्रधानमंत्री बने रहेंगे सुगा

सुगा ने पीएम बनने से पहले सुगा ने 534 में से 377 वोट हासिल करके कंज़र्वेटिव लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीएल) के अध्यक्ष पद पर जीत हासिल की. जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी और पूर्व रक्षा मंत्री शीगेरू इशिबा को 68 और दूसरे प्रतिद्वंद्वी और पूर्व विदेश मंत्री फूमिओ किशिदा को 89 वोट मिले. आज संसद में वोटिंग के बाद उन्हें देश का अगला प्रधानमंत्री चुन लिया गया है. उनकी सितंबर 2021 के चुनाव तक प्रधानमंत्री बने रहने की उम्मीद है. सुगा ने 7 साल से ज्यादा समय तक आबे के मुख्य कैबिनेट सचिव के रूप में काम किया है.
जापान की समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने बताया कि 71 साल की उम्र में सुगा साल 1991 में किची मियाजावा के बाद यह पद संभालने वाले सबसे उम्रदराज प्रधानमंत्री हैं. सुगा ने कहा है कि वह आबे की नीतियों को आगे बढ़ाना जारी रखेंगे, जिसमें आक्रामक मौद्रिक सहजता, राजकोषीय प्रोत्साहन और संरचनात्मक सुधारों के आबेनॉमिक्स शामिल हैं. ये प्रयास मंदी से प्रभावित जापानी अर्थव्यवस्था को पुर्नजीवित करने के लिए हैं.

‘आबे के बिना भी, आबे सरकार जारी रहेगी’

योशीहिदे सुगा किसान और अनुभवी राजनेता के बेटे हैं. टोक्यो में सोफिया विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर डीन कोइची नाकानो के मुताबिक, शिंजो आबे और अन्य पार्टी के अध्यक्षों ने भी सुगा का समर्थन किया था, क्योंकि वह ‘निरंतरता’ को जारी रखने के लिए सबसे अच्छे उम्मीदवार हैं. उन्होंने कहा कि “अबे के बिना भी, अबे सरकार जारी रहेगी.” हालांकि सुगा को बहुत सक्रिय और उत्साही राजनीतिज्ञ नहीं माना जाता है, लेकिन वह एक बहुत ही सक्षम और व्यावहारिक व्यक्ति के रूप में जाने जाते हैं. उनकी सबसे उल्लेखनीय उपस्थिति तब हुई जब सम्राट अकिहितो ने साल 2019 में अपने बेटे नोरोहितो के पक्ष में इस्तीफा दे दिया था. तब सुगा को जापान और दुनिया को नए रीवा युग के बारे में बताने का काम सौंपा गया था. वह शिंजो आबे के इस्तीफे के बाद पार्टी का नेतृत्व करने वाले पसंदीदा नेता थे. पार्टी पर्यवेक्षकों का मानना है कि इस समय पार्टी का संतुलन एक एकल गतिशील व्यक्ति में बदल गया है, जो बड़ी संख्या में मतदाताओं तक पहुंच सकता है.

पीएम बनने के बाद सुगा ने देश से किए ये वादे

पीएम बनने के बाद सुगा ने कहा है कि हम वित्तीय खर्च और बुनियादी ढांचे में सुधार के माध्यम से जापान को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाएंगे. लेकिन इससे पहले हमें कोरोना वायरस जैसी महामारी से निपटने के लिए कुछ करना होगा. सुगा ने कोरोना वायरस का व्यापक परीक्षण करने और 2021 की शुरुआत में जापान को वैक्सीन देने का वादा किया है. उन्होंने न्यूनतम वेतन बढ़ाने, कृषि सुधारों को शुरू करने और पर्यटन को बढ़ावा देने का भी वादा किया है. बता दें कि आबे संविधान के उस हिस्से को बदलना चाहते थे, जो औपचारिक रूप से जापान की सेना को मान्यता देता था, जिसे अब आत्मरक्षा बल के रूप में जाना जाता है. प्रोफेसर डीन कोइची नाकानो ने बताया कि शिंजो आबे का एक मात्र नारा “स्व-सहायता, पारस्परिक सहायता और जन समर्थन” है, जो नए उदारवादियों की ‘स्व-सहायता और जिम्मेदारी’ पर जोर देता रहा है.

जापान में सबसे लंबे समय तक पीएम रहे शिंजो

शिंजो आबे ने कहा कि वह नहीं चाहते कि उनकी बीमारी उनके निर्णय लेने में बाधा डाले और वह जापानी लोगों से अपना कार्यकाल पूरा न करने के लिए माफी मांगे. 65 साल के आबे कई सालों से अल्जाइमर कोलाइटिस से पीड़ित हैं. उन्होंने बताया कि हाल ही में मेरी हालात ज्यादा खराब हुई है. शिंजो आबे पिछले साल जापान के सबसे लंबे समय तक रहने वाले प्रधानमंत्री बने थे. शिंजो सबसे पहले साल 2006 में जापान के प्रधानमंत्री बने थे. इसके बाद साल 2007 में उन्होंने बीमारी की वजह से पद से इस्तीफा दे दिया था. लेकिन साल 2012 में वह फिर जापान के पीएम बने और अबतक इस पद पर बने रहे.

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