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जीरो ऑयल भोजन मोटापा कम करने में सहायक

विजय न्यूज़ नेटवर्क
जीवन को जीने के लिए क्या जरूरी है-भोजन। लेकिन क्या ऐसा होता है कि हमें भोजन के नाम पर कुछ भी दे दिया जाए तो हम खा लेंगे जब तक वह स्वाद से परिपूर्ण न हो और हम भारतीय तो अपने खान-पान की पौष्टिकता से अधिक स्वाद पर ही ध्यान देते हैं। भोजन में मीठे के प्रति हमारा आकर्षण सर्वव्यापी है और भारतीयों का मीठे के प्रति कुछ विशेष ही लगाव है। हमारी मानसिक धारणा के अनुसार बिना मिठाई का खाना हमें एक अधूरेपन का एहसास कराता है व एक बहुत बड़ी गलत धारणा हमारे दिमाग में घर कर चुकी है कि चर्बी रहित खाना, चाहे कितना भी चीनी युक्त हो, शरीर पर वजन नहीं बढ़ाता तथा हमारा अवचेतन मन ऐसे स्वाद की कल्पना ही नहीं कर पाता जो बिना घी, तेल, मक्खन आदि से बने खाद्य पदार्थों से मिला हो।
साओल हार्ट सेंटर के निदेशक, डॉ.बिमल छाजेड़ का कहना है कि मोटापा जीवन भर चलने वाली एक क्रोनिक समस्या है। शरीर में जब अनुपात से 20 प्रतिशत अधिक चर्बी जमा हो जाती है तो यह नुकसानदायक हो जाता है। अगर मोटापे के कारणों की बात करें तो जरूरत से श्यादा खाना, कार्बोहाइड्रेट्स का अधिक मात्रा में सेवन, बार-बार खाना खाना, धीरे-धीरे या देर से पचना, शारीरिक श्रम न करना, दवाइयों का सेवन, मनोचिकित्सक विकार का शिकार होना आदि मुख्य हैं। मोटापा होने से कई स्वास्थ्य समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं जैसे मधुमेह, उच्च रक्तचाप व ह्रदय रोग आदि। इसलिए डाक्टरों का कहना है कि मोटापा कम करना आवश्यक है। वैसे भी कई बार शल्य रहित प्रक्रियाओं जैसे डाइट मैनेजमेंट व व्यायाम से आवश्यक चर्बी कम नहीं की जा सकती। अपने खान पान में जीरों ऑयल का इस्तेमाल करके मोटापा और हार्ट अटैक पर नियंत्रण किया जाता सकत है।

डॉ.बिमल छाजेड़

डॉ.बिमल छाजेड़ का कहना है कि इसका एक ऐसा उपाय है जिससे न तो आपके स्वाद में कमी आएगी और न ही कोलेस्ट्रोन या वसा आपके शरीर में आक्रमण कर पाएगा। चिकित्सा संबंधी मूल्यांकन, खतरा का मूल्यांकन, शारीरिक क्षमता के अनुरूप व्यायाम, व्यक्ति पर व्यायाम कार्यक्रम, खतरा दूर करने में सहयोग एवं ज्ञान, पथ्य नियम समझाना एवं परामर्श, धूम्रपान त्यागना, तनाव पर नियंत्रण, योग, ध्यान व चिंतन। हृदय रोगियों को इन सभी तरीकों द्वारा उनकी बीमारी से तो निजात दिलाई जा सकती है, मगर लोग अगर अपने खान-पान का भरपूर ख्याल रखें तो लोग इस बीमारी की चपेट में आएं ही ना। विशेषज्ञों का कहना है कि बिना तेल के खाना कैसे बनेगा, क्या उसमें स्वाद भी होगा। अगर आप ढंग से विचार करें तो उत्तर हां में मिलेगा क्योंकि स्वाद तो मसाले से ही आता है। तेल में अपना कोई स्वाद नहीं होता है। जब हम तेल हटाने को कहते हैं तो मसाले अपने आप हट जाते हैं। ऐसा इसलिए होता हैं क्योंकि गृहणियां यह नहीं जानती कि अगर बर्तन में तेल नजर नहीं आएगा तो मसाले कैसे मिट जाएंगे ? इससे साओल के जीरो तेल के विचार को विकसित करने का विचार आता है। हमारा मतलब है कि तेल की एक बूंद के बगैर खाना पकाना।
लोगों के स्वभाव को इतनी जल्दी आसानी से बदला नहीं जा सकता है भोजन में जीरो ऑयल अवधारणा को सामने लाकर कोलेस्ट्रोल के खतरे को कम करने में भी मदद मिली है। हमारे देश में नाश्ता या नमकीन तैयार करने के लिए खूब तेल-घी इस्तेमाल करने की परंपरा है जो हृदय रोगियों के लिए बहुत ही खतरनाक है। इसलिए हमारे द्वारा बताए गए तरीकों को अपनाकर देखिए-हृदय रोगियों को इन सभी कारणों को हटाने की जानकारी होनी चाहिए जो कि जीवन शैली में परिवर्तन, आहार में परिवर्तन, योगा, व्यायाम और जरूरत हो तो दवाईयों में परिवर्तन करके किया जा सकता है। डॉ.बिमल छाजेड़ का कहना है कि खाना जीरों ऑयल एवं शाकाहारी होना चाहिए। इन्होंने लगभग एक हजार तरह के स्वादिष्ट व्यंजन बनाए हैं जो आप लोग आसानी से अपने घर में बना सकते हैं। ये आहार आपके हृदय धमनियों से वसा के जमाव को घटाता है।

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